मैच्योरिटी पर कुल रकम ₹1,41,478
- लगाई गई रकम
- ₹1,00,000
- कुल ब्याज
- ₹41,478
यह टैक्स से पहले का अनुमान है। तय सीमा से ज़्यादा ब्याज पर TDS कट सकता है, और बैंक का हिसाब थोड़ा अलग हो सकता है।
FD में पैसा लगाने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि मैच्योरिटी पर हाथ में कितनी रकम आएगी। ऊपर जमा रकम, बैंक की ब्याज दर, अवधि और ब्याज जुड़ने का तरीका चुनें, नतीजा तुरंत दिख जाएगा। ज़्यादातर बैंक FD पर ब्याज हर 3 महीने में जोड़ते हैं, इसलिए वही पहले से चुना हुआ है।
FD की मैच्योरिटी कैसे निकलती है? (फॉर्मूला)
FD में ब्याज पर भी ब्याज मिलता है (चक्रवृद्धि या compounding)। मैच्योरिटी रकम इस फॉर्मूले से निकलती है:
A = P × (1 + r/n)n × t
- A = मैच्योरिटी पर कुल रकम
- P = जमा की गई रकम
- r = सालाना ब्याज दर (जैसे 7% = 0.07)
- n = साल में कितनी बार ब्याज जुड़ता है (हर 3 महीने = 4)
- t = कितने साल
उदाहरण: ₹1 लाख की FD, 7% ब्याज
| अवधि | मैच्योरिटी रकम (ब्याज हर 3 महीने) | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹1,07,186 | ₹7,186 |
| 3 साल | ₹1,23,144 | ₹23,144 |
| 5 साल | ₹1,41,478 | ₹41,478 |
यही ₹1 लाख 5 साल के लिए, अगर ब्याज साल में एक बार जुड़े तो ₹1,40,255 बनते हैं, और हर महीने जुड़े तो ₹1,41,763। यानी ब्याज जितनी जल्दी जुड़ता है, कमाई थोड़ी ज़्यादा होती है।
FD पर टैक्स और TDS
- FD का ब्याज आपकी आमदनी में जुड़ता है और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से उस पर टैक्स लगता है।
- एक बैंक से साल भर का ब्याज तय सीमा से ज़्यादा हो तो बैंक TDS काटता है। 1 अप्रैल 2025 से यह सीमा आम जमाकर्ताओं के लिए ₹50,000 और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹1 लाख है। PAN दिया हो तो TDS 10% कटता है, नहीं दिया तो 20%।
- कुल आमदनी टैक्स के दायरे में न हो तो बैंक में Form 15G (60 साल से कम) या 15H (वरिष्ठ नागरिक) देकर TDS रुकवाया जा सकता है।
इसलिए कैलकुलेटर का नतीजा टैक्स से पहले की रकम है। आपके हाथ में आने वाली असली रकम आपके टैक्स स्लैब पर निर्भर करेगी।
FD कितनी सुरक्षित है?
बैंक में जमा पैसे पर DICGC (RBI की एक संस्था) बीमा देती है: एक बैंक में एक जमाकर्ता के सभी खातों और FD को मिलाकर ₹5 लाख तक, मूल और ब्याज दोनों। इस सीमा को बढ़ाने पर चर्चा चल रही है, इसलिए बड़ी रकम लगाने से पहले DICGC की वेबसाइट पर ताज़ा सीमा देख लें। ₹5 लाख से ज़्यादा जमा करनी हो तो अलग-अलग बैंकों में बाँटना एक आम तरीका है।
FD से ज़्यादा कमाई के छोटे तरीके
- दरें मिलाएँ: सरकारी, निजी और स्मॉल फाइनेंस बैंकों की दरों में फ़र्क होता है। हमारी बेस्ट FD रेट्स वाली गाइड देखें।
- FD लैडरिंग: पूरी रकम एक FD में डालने की जगह 1, 2 और 3 साल की अलग-अलग FD बनाएँ। हर साल कुछ पैसा खाली होता रहेगा और दरें बढ़ें तो उसका फायदा भी मिलेगा।
- समय से पहले न तोड़ें: FD बीच में तोड़ने पर बैंक अक्सर ब्याज में कटौती करते हैं। इमरजेंसी के पैसे अलग रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बैंक की मैच्योरिटी रकम कैलकुलेटर से थोड़ी अलग क्यों है?
बैंक दिनों के हिसाब से ब्याज गिनते हैं, और कुछ बैंक कम अवधि की FD पर साधारण ब्याज देते हैं। इसलिए कुछ रुपयों का फ़र्क आ सकता है। आखिरी आँकड़ा बैंक की FD रसीद पर देखें।
हर महीने ब्याज लेने वाली FD में क्या होता है?
अगर ब्याज हर महीने या हर 3 महीने आपके खाते में भेजा जाता है (non-cumulative FD), तो उस पर आगे ब्याज नहीं जुड़ता। यह कैलकुलेटर cumulative FD के लिए है, जिसमें ब्याज मैच्योरिटी पर एक साथ मिलता है।
FD की पूरी जानकारी के लिए पढ़ें: FD क्या है और खाता कैसे खोलें। लंबे निवेश की तुलना करनी हो तो Mutual Fund vs FD भी देखें।
स्रोत: आयकर विभाग (TDS नियम), DICGC (जमा बीमा)। जानकारी 20 अक्टूबर 2026 तक की है।
यह कैलकुलेटर और जानकारी केवल समझने के लिए है, निवेश सलाह नहीं। FD खोलने से पहले बैंक की ताज़ा दरें और शर्तें देखें।
